हिमाचल प्रदेश को भारी बारिश ने तबाह कर दिया: कारणों का खुलासा

Himachal Pradesh बारिश से संबंधित गंभीर आपदाओं से जूझ रहा है, जिसमें 55 से अधिक लोगों की जान चली गई है। राज्य लगातार भारी बारिश, बादल फटने और भूस्खलन से प्रभावित हुआ है, जिसके परिणामस्वरूप घर ढह गए, सड़कें अवरुद्ध हो गईं और विनाश का सिलसिला शुरू हो गया।

प्रभावित जिले(Affected Districts in Himachal Pradesh):

इस त्रासदी ने विभिन्न जिलों को बुरी तरह प्रभावित किया है – मंडी में 19 लोगों की मौत हुई, सोलन में 11 लोगों की मौत हुई, शिमला में 14 लोगों की मौत हुई और हमीरपुर में चार लोगों की मौत पर शोक व्यक्त किया गया।

बचाव कार्य जारी है(Rescue Operations Underway)

इस संकट का मुकाबला करने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल NDRF), सेना और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) द्वारा संयुक्त प्रयास किए जा रहे हैं। इन ऑपरेशनों का फोकस समरहिल और फागली जैसे भूस्खलन प्रभावित इलाकों पर है। इस आपदा ने कई जिलों को निराशा में डाल दिया है। मंडी, सोलन, शिमला और हमीरपुर में कई लोगों की जान जाने की खबर है।

 आगे अप्रत्याशित मौसम (The Unpredictable Weather Ahead for Himachal Pradesh)

भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने मौसम के और चिंताजनक मिजाज की भविष्यवाणी की है। अगले 24 घंटों में हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। दोनों राज्य अब “रेड अलर्ट” के अंतर्गत हैं, बाद में इसे डाउनग्रेड करके “ऑरेंज अलर्ट” कर दिया जाएगा। बारह में से नौ जिलों में अत्यधिक भारी बारिश होने की आशंका है। जबकि कुल्लू, किन्नौर और लाहौल-स्पीति को बचाया जा सकता है, मंगलवार के लिए पीली चेतावनी अभी भी प्रभावी है।

मूसलधार बारिश के पीछे: मौसम संबंधी अंतर्दृष्टि(Behind the Downpours: Meteorological Insights)

आईएमडी के डॉ. चरण सिंह ने स्पष्ट किया है कि चल रही भारी बारिश कई कारकों के संयोजन से प्रभावित है। अरब सागर से आने वाली दक्षिण-पश्चिमी हवाओं के साथ मिलकर एक पश्चिमी विक्षोभ इस जलप्रलय का कारण बन रहा है। जबकि पहले दिन के बाद तीव्रता कम होने का अनुमान है, अगले 24 घंटों के लिए रेड अलर्ट जारी रहेगा, उसके बाद ऑरेंज अलर्ट जारी रहेगा।

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 जलप्रलय के मूल कारण (Root Causes of Heavy Rain)

Himachal Pradesh  में भारी वर्षा का कारण बादल फटने और भूस्खलन की एक श्रृंखला है जिसने इस मानसून के मौसम के दौरान इस क्षेत्र को प्रभावित किया है। ऐसी चौंका देने वाली 170 घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिससे लगभग 9,600 घरों को आंशिक या पूर्ण क्षति हुई है। पिछले महीने, राज्य को भारी नुकसान हुआ था, भूस्खलन और बाढ़ के कारण 130 लोगों की जान चली गई थी।

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मानसून गतिशीलता की व्याख्या(Monsoon Dynamics Explained)

वर्तमान में, मानसून की ताकत कम हो रही है, जैसा कि बदलते मानसून गर्त से संकेत मिलता है। यह ट्रफ रेखा, जो आमतौर पर सिंधु-गंगा के मैदानी इलाकों को कवर करती है, उत्तर की ओर बंगाल की खाड़ी की ओर बढ़ गई है। इस महीने के दौरान, हिमाचल प्रदेश में 147.40 मिमी बारिश हुई है, जो सामान्य स्तर 140.20 मिमी से थोड़ा अधिक है।

Himachal Pradesh भारी बारिश के पीछे का विज्ञान(The Science Behind the Heavy Rain)

आईएमडी के महानिदेशक एम महापात्र के अनुसार, हाल की भारी बारिश आंशिक रूप से मानसून ट्रफ के उत्तर की ओर हिमालय की तलहटी में स्थानांतरित होने के कारण है। पिछले एक सप्ताह से लगातार हो रही भारी बारिश ने स्थिति को और खराब कर दिया है। रविवार और सोमवार को मानसून ट्रफ के साथ कमजोर पश्चिमी विक्षोभ के संपर्क ने समस्या को बढ़ा दिया है। हालाँकि, ट्रफ़ के अस्थायी रूप से दक्षिण की ओर खिसकने से पहाड़ियों में बारिश कम होने और पूर्व-मध्य भारत में तेज़ होने की उम्मीद है।

 

Himachal Pradesh में पूर्वानुमानित पैटर्न (Predictable Patterns in the Himalayas)

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के पूर्व सचिव एम राजीवन ने हिमालय क्षेत्र में अनुमानित भारी वर्षा पर प्रकाश डाला है। यह घटना तब घटित होती है जब मानसून अंतराल के दौरान मानसून ट्रफ तलहटी के करीब चला जाता है, जिससे पहाड़ियों और पूर्वोत्तर भारत में केंद्रित वर्षा होती है।

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निष्कर्ष के तौर पर

चूंकि हिमाचल प्रदेश मूसलाधार बारिश के बाद से जूझ रहा है, इसलिए मौसम के मिजाज और भूवैज्ञानिक कारकों की परस्पर क्रिया को समझना महत्वपूर्ण है। प्रभावित क्षेत्रों की सुरक्षा और भलाई सुनिश्चित करने के लिए बचाव टीमों के संयुक्त प्रयास और मौसम अधिकारियों की सतर्कता सर्वोपरि है।\

 

सूचना प्रश्नोत्तरी: हिमाचल प्रदेश की बारिश की समस्या को समझें

  1. Himachal Pradesh में क्या हो रहा है?
    • भारी बारिश, बादल के फटने और भूस्खलन के कारण 55 से अधिक लोगों की मौके पर मौत हो गई है और घरों और सड़कों को नुकसान पहुंचा है।
  2. किसकी अगुआई में बचाव की कोशिशें हो रही है?
    • राष्ट्रीय आपत्काल प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ), सेना और राज्य आपत्काल प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) मिलकर प्रभावित व्यक्तियों को बचाने के लिए काम कर रहे हैं।
  3. कौनसे जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं?
    • मंडी, सोलन, शिमला और हमीरपुर में उपयुक्त जीवन खो चुके हैं इस महामारी के कारण।
  4. आगामी दिनों के लिए पूर्वानुमान क्या हैं?
    • भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, आगामी 24 घंटों में हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भारी बारिश का पूर्वानुमान है, जिसके बाद अवधि में कमी होगी।
  5. इन भारी बारिशों की क्या वजह है?
    • पश्चिमी प्रवृत्ति और अरब सागर से आने वाली दक्षिणपश्चिमी हवाएं इस तेज बारिश का कारण हैं।
  6. मॉनसून ने कैसा प्रभाव डाला है?
    • इस मॉनसून में अब तक 170 बादल फटने और भूस्खलन की घटनाएँ रिपोर्ट हुई हैं, जिनसे लगभग 9,600 घरों में नुकसान हुआ है। पिछले महीने, भारी बारिश के कारण 130 लोगों की मौके पर मौत हो गई।
  7. हाल की बारिश के रिकॉर्ड क्या है?
    • इस महीने के पहले दो हफ्तों में, हिमाचल प्रदेश को 147.40 मिमी बारिश हुई है, जो कि सामान्य स्तर के 140.20 मिमी की तुलना में 5% अधिशेष है।
  8. मॉनसून ट्रफ की क्या भूमिका है?
    • मौसम विज्ञानियों के अनुसार, मॉनसून ट्रफ की उत्तरी ओर की गतिशीलता के कारण ही यह भारी बारिश हो रही है। यह मॉनसून ब्रेक के दौरान सामान्य पूर्वानुमान में पहाड़ियों और पूर्वोत्तर भारत में तेज बरसात पैदा करने का कारण है।
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